06 Mar 2008

 

 

ग़म्बरे इस्लाम:

 जिस किसी ने आप के साथ भलाई की असको पारितोषिक दीजिए, यदी कुछ न मिले उसकी प्रशसा कीजिए, क्योंकि प्रशसा करना भी पारितोषिक है।