05/Mar/2008
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ईरान के विरुद्ध सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के ग़ैर क़ानूनी होने पर ईरान का बल। संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरान के प्रतिनिधि मोहम्मद ख़ज़ाई ने ईरान की परमाणु गतिविधियों के शांतिपूर्ण होने और इस विषय की अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए के महानिदेशक मोहम्मद अलबरादई की गई पुष्टि पर बल देते हुए तेहरान के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पारित नए प्रस्ताव को क़ानूनी दृष्टि से अमान्य कहा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सोमवार तीन मार्च को पश्चिम के प्रस्ताव के मसौदे को जिसे क्षूठे दावों और पूर्णत: राजनैतिक वातावरण में सुरक्षा परिषद में प्रस्तुत किया गया था, पारित कर दिया। प्रस्ताव क्रमांक 1803 जो गत दो वर्षों के भीतर ईरान पर प्रतिबंध लगाने के संबंध में तीसरा प्रस्ताव है, कई आयामों से समीक्षा योग्य है। प्रथाम यह कि यह प्रस्ताव ऐसे समय में पारित हुआ जब इसी के साथ साथ अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए के महानिदेशक मोहम्मद अलबरादई ने एजेंसी के निदेशक मण्डल में ईरान के बारे में सकारात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की । एजेंसी की रिपोर्ट में स्पष् रुप से कहा गया है कि ईरान के परमाणु मामले से संबंधित बचे हुए विषय, तेहरान के साथ पूर्ण सहयोग से पूर्णत: हल हो गए हैं। दूसरा बिन्दू यह है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ईरान के विरुद्ध प्रस्ताव पारित करने में जल्दबाज़ी से काम लिया है। यह प्रक्रिया दर्शाती है कि प्रस्ताव तय्यार करने वालों की दृष्टि में आईएईए की रिपोर्ट महत्व नहीं रखती है और धौंस धमकी देने वाले कुछ देशों के लिए जो बात महत्व रखती है व संयुक्त राष्ट्र संघ और सुरक्षा परिषद पर उनके राजनैतिक उद्देश्यों का शोपा जाना है। यही कारण है कि ईरान के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का नया प्रस्ताव उनहीं दावों के आधार पर पारित हुआ जो एजेंसी की रिपोर्ट से पूर्व भी किया जा चुका था। यह बिन्दु इस बात का दूसरा तर्क है कि प्रस्ताव की प्रवृत्ति राजनैतिक है और तकनीकी आयामों दूर है। इस प्रकार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ऐसे मार्ग पर क़दम बढ़ाया है जिसकी ओर इससे पूर्व फ़्रांस के अधिकारी संकेत करते हुए कह चुके थे कि यह बात महत्वपूर्ण नहीं है कि अलबरादई अपनी रिपोर्ट में ईरान के बारे में क्या दृष्टिकोण व्यक्त करेंगे बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि ईरान के बारे में सुरक्षा परिषद के दृष्टिकोण को व्यवहारिक बनाया जाए। ईरान के परमाणु मामले के विरुद्ध भ्रांति उत्पत्र करने के उद्देश्य से आईएईए के निदेशक मण्डल की आरंभिक बैठो में अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस के प्रतिनिधियों के कुप्रचार ने यह दर्शा दिया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद कुछ गिने चुने देशों के राजनैतिक दबाव में आकर एक जटिल राजनैतिक खेल में कूद पड़ी है जिससे इस अंतर्राष्ट्रीय संस्था की विश्वस्नीयता को पहले से अधिक आघात पहुंचेगा। स्पष्ट है कि ऐसे वातावरण में लिए गए निर्णय क़ानूनी दृष्टि से अमान्य हैं। युरेनियम संबर्धन के स्थगन की मांग भी बारम्बार की गई ग़ैर क़ानूनी मांग की भांति है जो परमाणु अप्रसार संधि का उल्लंघन भी है और इस्लामी गणतंत्र ईरान भी एक ऐसी मांग को जो क़ानूनी दृष्टि से निराधार और राजनैतिक दृष्टि से धौंस व धमकी से भरी हुई है, स्वीकार नहीं करेगा।
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